पौलोमी पाविनी शुक्ला सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता एवं भारत के 2.9 करोड़ अनाथों की आवाज़

भारत में आज तक अनाथ बच्चों की कोई आधिकारिक सर्वेक्षण प्रक्रिया नहीं हुई है। “वीकेस्ट ऑन अर्थ: ऑर्फन्स ऑफ इंडिया” की लेखिका पौलोमी पाविनी शुक्ला अनाथ बच्चों के अधिकारों एवं उनके लिए आरक्षण सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से सतत संघर्षरत हैं।

जब सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता पौलोमी पाविनी शुक्ला विधि अध्ययन कर रही थीं, तब उन्होंने आपराधिक वकील बनने का निश्चय किया था किंतु अनाथ बच्चों के साथ निकटता से कार्य करने के दौरान उनका रुझान सामाजिक सक्रियता की ओर हुआ तथा उन्होंने संविधान और मानवाधिकारों में विशेष रुचि विकसित की।

देश में “अनाथ बच्चे के लिए कॉलेज जाने की कोई संरचित व्यवस्था नहीं” होने से व्यथित होकर उन्होंने अनाथों से संबंधित प्रावधानों, योजनाओं एवं देखभाल तंत्र का गहन अध्ययन किया। उन्होंने विभिन्न राज्यों के सैकड़ों अनाथालयों का भ्रमण कर जमीनी स्थिति को समझा।

वर्ष 2015 में, 29 वर्षीय अधिवक्ता ने “वीकेस्ट ऑन अर्थ: ऑर्फन्स ऑफ इंडिया” का सह-लेखन किया तथा उसी नाम से एक व्यक्तिगत पहल एवं अभियान प्रारम्भ किया। उसी वर्ष उन्होंने एक जनहित याचिका दायर की, जिसमें मानकीकृत शिक्षा, अनाथों की आधिकारिक गणना एवं शिक्षा व रोजगार में आरक्षण की मांग रखी गई। उनके प्रयासों के परिणामस्वरूप राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने अनाथों को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBCs) की श्रेणी में शामिल करने की अनुशंसा की, और कई राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों ने शिक्षा में आरक्षण तथा आर्थिक सहायता प्रदान करने की पहल की।

फोर्ब्स इंडिया की 30 अंडर 30 सूची में मान्यता प्राप्त पौलोमी अपने दीर्घकालिक मिशन पर निरंतर अग्रसर हैं। उनके शब्दों में — “जब आप इन बच्चों से मिलते हैं, तो वे वास्तव में आपको प्रेरित करते हैं… यदि आप उनमें से किसी एक को भी एक अच्छे विद्यालय में प्रवेश दिला सकें, या 18 वर्ष की आयु के बाद उसकी शिक्षा के लिए कोई सहयोग सुनिश्चित कर सकें, तो यह एक महान उपलब्धि का अनुभव होता है और तब यह कार्य सार्थक प्रतीत होता है।”

अभियान

भारत के प्रत्येक अनाथ को एक समान नागरिक बनाना — सशक्त, संरक्षित एवं समाज में दृश्यमान।

दृष्टिकोण

एक न्यायपूर्ण भारत, जहाँ प्रत्येक अनाथ को बचपन, सुरक्षा, गरिमा, शिक्षा और सपनों का अधिकार प्राप्त हो — दान के रूप में नहीं, बल्कि अधिकार के रूप में।


आंदोलन

अनाथों को भारत का समान नागरिक बनाना

पौलोमी ने “वीकेस्ट ऑन अर्थ: ऑर्फन्स ऑफ इंडिया” पुस्तक का सह-लेखन करने के पश्चात उसी नाम से एक अभियान प्रारम्भ किया, जिसका उद्देश्य भारत के लगभग 300 लाख अनाथ बच्चों की दयनीय स्थिति को उजागर करना था।

  • पुस्तक प्रकाशन: वर्ष 2015 में “वीकेस्ट ऑन अर्थ: ऑर्फन्स ऑफ इंडिया” का सह-लेखन।
  • जागरूकता अभियान: अनाथ बच्चों की उपेक्षा को उजागर करने के लिए “वीकेस्ट ऑन अर्थ” अभियान का शुभारंभ।
  • जनहित याचिका:: अभियान की गति को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा एवं रोजगार में अनाथ बच्चों के लिए आरक्षण की मांग हेतु एक जनहित याचिका दायर की।

पुस्तक

वीकेस्ट ऑन अर्थ

ऑर्फन्स ऑफ इंडिया

भारत के सबसे संवेदनशील और उपेक्षित वर्ग अनाथ बच्चों — की अनकही कहानी को जानिए। “वीकेस्ट ऑन अर्थ: ऑर्फन्स ऑफ इंडिया” में साक्षात्कार, क्षेत्रीय भ्रमण एवं नीतिगत विश्लेषण के माध्यम से संकलित तथ्य यह उजागर करते हैं कि किस प्रकार ये बच्चे कानूनी पहचान के अभाव, सामाजिक कलंक तथा सीमित शैक्षिक एवं आर्थिक अवसरों जैसी अदृश्य बाधाओं का सामना करते हैं।

  • पौलोमी पाविनी शुक्ला लेखिका | वीकेस्ट ऑन अर्थ