नीतिगत परिवर्तन एवं अनाथ बच्चों के लिए आरक्षण

''अनाथ’ बच्चे भी ‘आरक्षण’ (नौकरियों, शैक्षणिक संस्थानों आदि में) के उतने ही अधिकारी हैं, जितने अन्य वर्गों (SC, ST या OBC) के वे बच्चे जिनके माता-पिता हैं और जिन्हें राज्य द्वारा यह सुविधा प्रदान की गई है।''

  • माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि अनाथ बच्चों को शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत सम्मिलित किया जाए। आदेश देखें
  • उत्तराखंड ने शिक्षा एवं नौकरियों में अनाथ बच्चों को 5 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया है।
  • महाराष्ट्र ने शिक्षा में 1 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया है।
  • गोवा ने भी सर्वोच्च न्यायालय में 1 प्रतिशत आरक्षण की प्रतिबद्धता व्यक्त की है।
  • तेलंगाना ने अनाथ बच्चों को अन्य पिछड़ा वर्ग में सम्मिलित करते हुए शिक्षा एवं नौकरियों में आरक्षण प्रदान किया है।
  • तमिलनाडु ने अनाथ बच्चों को समूह -घ नौकरियों तथा शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में सीटों पर आरक्षण प्रदान किया है।

20M+

भारत में अनाथ बच्चों की कुल संख्या

117से अधिक

ऐसे जिले जहाँ एक भी अनाथालय नहीं है

10M+

भारत में सड़कों पर रहने वाले बच्चों में अनाथों की संख्या

70%

भारतीय बच्चों को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त होता है, जबकि अनाथ बच्चे वंचित रह जाते हैं

बजट/भारत सरकार

वर्ष 2018-19 में “Child Protection” हेतु कुल बजटीय आवंटन Rs 725 करोड़ था, जो प्रति बच्चे प्रतिदिन रुपये 01 से भी कम है। वहीं भारत सरकार ने पिछले 5 वर्षों में एयर इंडिया को संचालित रखने के लिए Rs 23,000 करोड़ से अधिक राशि व्यय की है।

पौलोमी पाविनी शुक्ला द्वारा दायर जनहित याचिका में अनाथ बच्चों के लिए अधिक बजट एवं समर्थन की मांग की गई, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने 2018 में नोटिस जारी किया। इसके पश्चात संघ सरकार का अनाथों हेतु बजट Rs 750 करोड़ (2018-2019) से बढ़ाकर Rs 1500 करोड़ (2019-2020) किया गया।

पंजाब राज्य ने अनाथ बच्चों के लिए बजट में वृद्धि की है।

उपलब्धियाँ - राष्ट्रीय स्तर

पौलोमी पाविनी शुक्ला की P.I.L. के परिणामस्वरूप, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद संघ सरकार का अनाथों हेतु बजट Rs 750 Crores (2018-2019) से बढ़ाकर Rs 1500 Crores (2019-2020) किया गया।

श्री राघव लखनपाल, सांसद, ने संसद में अनाथ बच्चों की स्थिति एवं पुस्तक “वीकेस्ट ऑन अर्थ” का उल्लेख किया, जिससे इस विषय पर चर्चा प्रारंभ हुई।

राष्ट्रीय OBC आयोग ने अनुशंसा की है कि अनाथ बच्चों को शिक्षा एवं रोजगार के अवसरों हेतु OBC वर्ग का हिस्सा माना जाए।

उत्तराखंड ने शिक्षा एवं नौकरियों में 5 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया।

महाराष्ट्र ने शिक्षा में 1 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया।

गोवा ने सर्वोच्च न्यायालय में 1 प्रतिशत आरक्षण की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

दिल्ली ने अनाथ बच्चों को शिक्षा में विशेष अधिकार प्रदान कर RTE में सम्मिलित किया।

सिक्किम ने अनाथ बच्चों को शिक्षा में विशेष अधिकार प्रदान कर RTE में सम्मिलित किया।

छत्तीसगढ़ ने व्यापक नीतिगत परिवर्तन करते हुए सभी जिलों में अनाथालयों का विस्तार एवं अतिरिक्त बजट का प्रावधान किया।

पंजाब ने अनाथ बच्चों के लिए बजट में वृद्धि की।

उपलब्धियाँ - स्थानीय स्तर

उत्तर प्रदेश सरकार के शिक्षा विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर कक्षा 10 एवं 12 के अनाथ विद्यार्थियों हेतु कोचिंग एवं ट्यूशन की व्यवस्था की गई।

लखनऊ में “AAO - Adopt An Orphanage” कार्यक्रम प्रारंभ किया गया, जिसके अंतर्गत स्थानीय व्यापारिक प्रतिष्ठान पुस्तकें, लेखन-सामग्री, ट्यूशन शुल्क, नियमित भ्रमण आदि के माध्यम से सहयोग प्रदान करते हैं। यह कार्यक्रम अन्य नगरों में भी विस्तारित किया जा रहा है।

वर्ष 2020 में 124 अनाथ बच्चों से प्रारंभ करते हुए लखनऊ के विभिन्न अनाथालयों का स्थानीय उद्यमियों के साथ दीर्घकालीन समन्वय स्थापित किया गया, जिससे व्यावसायिक प्रशिक्षण एवं रोजगार उपलब्ध कराया जा सके। यह कार्यक्रम वर्तमान में उत्तर प्रदेश एवं हरियाणा के सात नगरों में विस्तारित हो रहा है।

COVID-19 लॉकडाउन के दौरान लखनऊ के सभी अनाथालयों में Smart TVs की व्यवस्था की गई, जिससे अनाथ बच्चों की ऑनलाइन शिक्षा निर्बाध रूप से संचालित हो सके।

उत्तर प्रदेश सरकार के दो विभागों की योजनाओं को समन्वित कर संपूर्ण राज्य में RTE Act का विस्तार करते हुए अनाथ बच्चों को सम्मिलित किया गया।

दिवाली-दान” अभियान के अंतर्गत 1000 से अधिक अनाथ बच्चों को गर्म वस्त्र, नाश्ता, कॉपियाँ, शैक्षणिक सामग्री एवं सेनेटरी नैपकिन वितरित किए गए।

“नौ-दिन, नौ अनाथालय” अभियान के अंतर्गत नवरात्रि के अवसर पर बालिका अनाथालयों हेतु दान अभियान संचालित किया गया।

पुस्तक पर प्रशंसात्मक टिप्पणियाँ

सुश्री पौलोमी पाविनी शुक्ला एक स्वप्रेरित युवा हैं, जिन्होंने भारत के अनाथ बच्चों की सहायता के लिए स्वयं को समर्पित किया है। उनका मत है कि माता-पिता से वंचित बच्चे समाज के सबसे कमजोर सदस्य हैं और उन्हें समाज एवं सरकार से अधिकतम समर्थन प्राप्त होना चाहिए।

श्रीमती रीता बहुगुणा जोशी

सांसद & एवं महिला एवं बाल कल्याण मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार

सुश्री पौलोमी पाविनी शुक्ला को उनकी पुस्तक “वीकेस्ट ऑन अर्थ” तथा सर्वोच्च न्यायालय में दायर रिट याचिका के माध्यम से अनाथ बच्चों के पक्ष में किए गए कार्यों के लिए सराहना प्रदान की जाती है।

श्री भूपेश बघेल

मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़

किसी राष्ट्र का विकास इस बात से आँका जा सकता है कि वह गरीब एवं असहाय लोगों के साथ कैसा व्यवहार करता है। “वीकेस्ट ऑन अर्थ” एक महत्वपूर्ण कृति है, जो अनाथ एवं वंचित बच्चों की उपेक्षित स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित करती है।

श्री जावेद अख्तर

पद्म भूषण

यह पुस्तक विशेष रूप से भारत के किशोर अनाथों की स्थिति पर आधारित एक गहन अध्ययन एवं विश्लेषणात्मक शोध है। यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है।

न्यायमूर्ति वी. एस. सिरपुरकर

न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय

यह राज्य के लिए गर्व का विषय है कि लखनऊ की सुश्री पौलोमी पाविनी शुक्ला ने अनाथ बच्चों के जीवन में सुधार हेतु एक महत्वपूर्ण अभियान प्रारंभ किया तथा सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका . दायर की।

श्री स्वतंत्र देव सिंह

मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार

यह समाज के उस वर्ग से संबंधित मुद्दों का उत्कृष्ट एवं व्यापक प्रस्तुतीकरण है, जिसकी आवाज़ अब तक अनसुनी रही है। डॉ. नरेश त्रेहन

डॉ. नरेश त्रेहन

पद्म भूषण, डॉ. बी. सी. राय पुरस्कार,अध्यक्ष, मेदांता

श्रीमती पौलोमी पाविनी शुक्ला का दूरदर्शी शोध कार्य “वीकेस्ट ऑन अर्थ” में अनाथ बच्चों की मौन पीड़ा को उजागर करता है, और यह नीति-निर्माताओं तथा नागरिक समाज दोनों को इस महत्वपूर्ण मानवीय समस्या का सामना करने के लिए प्रेरित करता है। उनका स्पष्ट और सुव्यवस्थित नीतिगत विश्लेषण, जो संवेदनशील केस स्टडीज के साथ प्रस्तुत किया गया है, बाल कल्याण अनुसंधान के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित करता है। लगातार की गई वकालत और सुप्रीम कोर्ट में दायर उनकी याचिका के माध्यम से, उन्होंने राज्य सरकारों को अनाथ बच्चों के लिए समर्पित निधि आवंटित करने और शैक्षिक आरक्षण बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है। लखनऊ निवासी पौलोमी पाविनी शुक्ला की यह अडिग प्रतिबद्धता सच्ची सार्वजनिक सेवा का उदाहरण प्रस्तुत करती है। हमें उम्मीद है कि उनके सतत नेतृत्व से भारत के सबसे कमजोर और संवेदनशील युवाओं के लिए परिवर्तनकारी सुधार लाने में मदद मिलेगी।

श्री केशरी नाथ त्रिपाठी

राज्यपाल, पश्चिम बंगाल एवं बिहार